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The Cockroach Movement: A Street Political Party

close up of a black ground beetle on bright yellow surface

Photo by Rafael Minguet Delgado on Pexels.com



भ्रष्टाचार कभी खत्म ही नहीं हुआ था। हम लोग ही मूर्ख थे, हमें लगा कि सब कुछ सुचारू रूप से काम कर रहा है। सत्ता में बैठे लोग आपकी वित्तीय स्थिति की परवाह किए बिना अभी भी रिश्वत लेते हैं। गरीब और मध्यम वर्ग के लोग अभी भी पीड़ित हैं। इन सत्ता के भूखे और संभ्रांत लोगों ने कभी भी आम लोगों को गंभीरता से नहीं लिया। और हम अभी तक इसी ख़ुशफ़हमी में जी रहे थे कि समय बदल गया है। लोगों के विचार बदल गए हैं और देश भी बदल गया है।

अब समय आ गया है कि भाजपा और दुनिया भर के कुछ अन्य सत्ता के भूखे नेताओं को थोड़े समय के लिए अपने काम से ब्रेक ले लेना चाहिए। 

यदि हर पार्टी सिर्फ दो कार्यकाल के लिए काम करेगी तो राजनीतिक दल एक-दूसरे के साथ अच्छी तरह से घुलमिल जाएंगे और सद्भाव में रहेंगे।

अमेरिका की तरह भारत में भी एक उच्च पद के नेता को दो कार्यकाल से ज़्यादा राजकाल नहीं सम्भालना चाहिए।

हर दो कार्यकाल के बाद, उन्हें दूसरे पक्ष को भी मौक़ा देना चाहिए, जानता के सामने सवाल जवाब का चलन होना चाहिए, ताकि जानता उनका जवाब सुनके ख़ुद निर्णय करे कि वह किस पार्टी को मौका देना चाहेगी।

जनता को भी यह देखने का मौका देना चाहिए कि दूसरी राजनीति पार्टी, राष्ट्र के लिए काम करता है या उसके खिलाफ।

इससे आज की नई पीढ़ी को अच्छे और बुरे परिणामों के बीच अंतर भी देखने का मौक़ा मिलेगा। अगर जनता को कोई बदलाव नजर नहीं आता है तो वे हमेशा पार्टी के खिलाफ वोट कर सकती हैं और नेता को अपने पद से हटा सकती हैं।

मुझे लगता है कि जब एक ही नेता इतने सालों और कार्यकाल से देश चला रहा है, तो यह स्वतः ही जनता के लिए धीरे धीरे नीरस हो जाता है।

जनता भी एक ही चेहरा देखने, एक ही आवाज, एक ही पटकथा, एक ही भाषण और एक ही राजनीतिक नाटक सुनने में रुचि खो देती है।

हम नागरिकों को भी विविधता देखने की जरूरत है। जब तक आप दूसरे पक्ष को मौका नहीं देंगे, हमारी अगली पीढ़ी को फर्क नहीं दिखेगा। 

आप जनता का ब्रेनवॉश करने के लिए बार बार विरोधी दलों का मिश्रित सच्ची झूठी कथन या बुरी का उपयोग नहीं कर सकते। यह अच्छे नेताओं के लक्षण नहीं होते हैं।

हमेशा एक बात याद रखें: लोग समय के साथ बदलते हैं, और हमारे नेता भी उन्हीं में से एक हैं।

मुझे लगता है कि अब समय आ गया है कि भाजपा को अन्य दलों को भी मौका देना चाहिए और उनकी नफरत और बदले की भावना को एक तरफ रख देना चाहिए।

मैंने देखा है कि भाजपा पार्टी अन्य विपक्षी दलों, विशेष रूप से कांग्रेस पार्टी के प्रति बहुत अधिक नफरत ज़ाहिर करती है। भाजपा और पार्टी के अनुयायी अपने खिलाफ बोलने वाले लोगों के प्रति बहुत ही आसानी से अपने हृदय में नफरत पैदा कर लेती है। इनकी पार्टी आलोचना को बिल्कुल भी स्वीकार नहीं कर पाती है, यहां तक कि रचनात्मक आलोचना को भी नहीं। जो कि बहुत ही अफ़सोसजनक और दुखदायी है।

मैं यह नहीं कह रही हूं कि उन्होंने कुछ भी अच्छा नहीं किया है, लेकिन जब कोई उनके खिलाफ आवाज उठाने की कोशिश करता है, खासकर कांग्रेस पार्टी, तो बीजेपी के नेता, और उनके अनुयायी अपने सभी शिष्टाचार भूल जाते हैं और महिलाओं सहित सभी सदस्यों का अपमान करने के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं।

भाजपा का नारा था, “सोच बदलो, देश बढ़ेगा” (अपने राष्ट्र को बदलने के लिए अपनी मानसिकता बदलो), लेकिन वे खुद इसका पालन ठीक तरह से नहीं कर पा रहे हैं।

उपदेश देने से पहले अभ्यास करें, सर। कृपया किसी भी पार्टी के प्रति अपनी नाराजगी को खत्म करें और उनके अंदर वर्तमान बदलाव या अच्छाई भी देखें।

याद रखें, आपके भी दामन में कुछ धब्बे हैं।

नफरत आपको या किसी को भी किसी ऊँचाई पर नहीं ले जाएगी, बल्कि यह आपको आपकी कब्र तक ले जाएगी। इतनी नफ़रत के साथ अपना अंत मत कीजिए। 

इसलिए अपनी जनता, अपने लोगों के प्रति थोड़ी समझदारी और सहानुभूति दिखायें।

शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन को कभी भी किसी दर्दनाक घटना में परिवर्तित मत कीजिए।

पहली बात तो यह है कि कोई भी विरोध प्रदर्शन 3 दिनों से अधिक नहीं चलना चाहिए। नेताओं को जनता की बात सुननी चाहिए क्योंकि यह उनका काम है।

श्री मोदी जी ने अपने पहले कार्यकाल के दौरान जनता को लुभाते हुए कहा था, “मैं आपका सेवक हूं, चौकीदार हूं”। मैं आपकी सेवा में उपस्थित हूं और मैं यह सुनिश्चित करूंगा कि आप सदैव खुश रहें।

एक सेवक या एक सच्चा नेता अपने ही लोगों को प्रताड़ित करने की अनुमति नहीं देता। वास्तव में, वह उनके साथ हर सुख-दुख में खड़ा रहता है।

एक सच्चा नेता स्वाभाविक रूप से दिलों को छूता है, बिना दिखावा किए या जबरन प्रयास किए।

अपनी गलतियों को सुधारने में कभी देर नहीं करनी चाहिए, मेरे प्यारे नेताओं। एक पुरानी कहावत याद है ना? “जब आंख खुले तभी सवेरा।” बस, अब आप सभी को भी, चाहे वह राइट में हो या लेफ्ट में, सभी नेताओं और उनके अंध भक्तों को अपने आप में सुधार लाने की आवश्यकता है।

दूसरों को उनकी गलतियों के लिए आंकना और दूसरो को दोष देकर कोई भी बेहतर नेता या इंसान नहीं बन पाएगा, और यह दुनिया के हर नेता और इंसान पर लागू होता है।

मेरे प्यारे भाजपा नेतागण, एक बात हमेशा याद रखें, “दुनिया के इस हमाम में हम सभी नंगे हैं।

एक नेता को अपने नागरिकों को दोष देने से पहले कुछ बुनियादी बातों पर भी ध्यान देना चाहिए।

उदाहरण के लिए, सत्ता जब हाँथ में आए तो सबसे पहले बेरोजगारी, शिक्षा घोटाला, संपत्ति घोटाला, गरीबी, भूख, स्वच्छ पानी, आतंकवादी संगठनों के खिलाफ काम करना, स्लीपर सेल, तस्करी, नशीली दवाओं की खपत, बेहतर बुनियादी ढांचा, सुरक्षित आश्रय और सड़कें, स्वच्छ फुटपाथ, कीट-मुक्त वातावरण, मजबूत, कुशल सैन्य सेवाएं, और इसी तरह कई अन्य भी जरूरत मंद और बेसिक कार्य पर काम करना चाहिए । इन सभी चीजों को संभालना वास्तव में बहुत आसान है, और ये चीजें नियंत्रण में भी रहेंगी, अगर इसे ठीक से निष्पादित किया जाए तो यह बेहतर भी दिखेगा।

कैसे?

प्रत्येक राज्य के मंत्री या राज्यपाल को संभावित नौकरियां सौंपें और उनसे मासिक अपडेट प्राप्त करें। उन्हें अपने कार्यों को पूरा करने के लिए एक समय सीमा दें, या उन्हें इस्तीफा देना होगा—इस तरह की शर्त रखें। बेशक, उन्हें पद से हटाने से पहले प्राकृतिक और स्थानीय आपदाओं को ध्यान में रखें।

और स्थानीय राज्यपाल, मुख्यमंत्री, या मेयर को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उनका अंदर कार्य कर रहे कर्मचारी, अपने समाज का निम्नलिखित पूर्ति ठीक तरह से कर रहा है या नहीं?

क्या उनके शहर की जनता खुलकर ताजी हवा में सांस ले सकती है?
क्या उन्हें दोनों समय का उचित भोजन प्राप्त हो रहा है?
क्या उनके रहने की जगह सुरक्षित है?
क्या उन्हें पीने के लिए पर्याप्त मात्रा में ताजा पानी मिल रहा है?
क्या उनके शहर में रहने वाले बच्चों और युवाओं को उचित शिक्षा प्रणाली दी गई है?
क्या उस समुदाय की बेरोज़गारी ख़त्म हो चुकी है? अगर नहीं तो इस पर भी काम करना चाहिए?
क्या उनके शहर, गाँव या कस्बे के लोग बेझिझक अपनी बात क़ानून तक पहुँचा पा रहे हैं?
क्या उन्हें क़ानून या पुलिस से डरकर तो नहीं रहना पड़ रहा है?
क्या सरकारी कर्मचारी बिना घूस खाए काम कर रहे हैं?
और क्या उनका समुदाय या समाज अपराध-मुक्त वातावरण में रह रहा है?


पहले इन बुनियादी बातों को पूरा करना चाहिए, आगे के बारे में सोचने से पहले, क्योंकि, अशिक्षित, बेरोजगार, और भूखा नंगा देश कभी आगे नहीं बढ़ पाएगा, चाहे वह कितना भी दिखावा कर ले। यदि समाज की बेसिक ज़रूरत की पूर्ति ही नहीं हो पा रही है, तो देश क्या खाक आगे बढ़ेगा?

इसलिए राज्य के मंत्री को स्थानीय एमएलए या मेयर को इस बेसिक कार्य पर ध्यान देने के लिए विवश करें, अगर वह लोग इसको पूरा नहीं कर पा रहें हैं तो उन्हें इस्तीफा देने पर विवश कीजिए, और कभी भी वह दोबारा इस पद पर काम नहीं कर पाए इसका भी निर्णय लीजिए। (जी हाँ! गड़बड़ी को ठीक करने के लिए थोड़ी सी स्वतंत्रता के साथ थोड़ा डर भी ज़रूरी है।)

ये कुछ बुनियादी हित हैं जिनके लिए एक नेता को अपने कर्तव्यों के साथ आगे बढ़ने से पहले पूरा करना चाहिए।

अफसोस की बात है कि हमारे नेता सत्ता में आते ही धर्म या नस्ल के खिलाफ जनता को और अपने अंधे भख्तों का ब्रेनवॉश करने में व्यस्त हो जाते हैं।

ऐसा लगता है कि वे अभी भी 16वीं शताब्दी में रहते हैं। ये लोग अभी भी जातिवाद और ‘फूट डालो और राज करो’ के युग में खुशी-खुशी चलते रहना चाहते हैं।

दुर्भाग्य से, हमारे जैसे आम जनता को इस गंदी राजनीति को समझने के लिए पर्याप्त बुद्धि ही नहीं है। और अगर हममें से कुछ अंश इस गंदी राजनीति को समझने में सक्षम हो जाते हैं, और अपनी आवाज उठाने की कोशिश करते  हैं; तो हम लोगों को सलाखों के पीछे डालकर या लाठी चार्ज से चुप करा दिया जाता है। 

अगर सरकार इस तरह के आंदोलन को संभालने का प्रबंध नहीं कर पाती है, तो वह अपने ही नागरिकों को, अपने ही बेटे बेटियों को मार मार कर दबा देती है।

जो बहुत ही क्रूर कदम  है। वह अपनी बात को सच साबित करने के लिए  एक महिला को मारने में भी संकोच नहीं करते हैं। अब पुरुषों के साथ साथ स्त्रियों के पास भी आवाज है। यह बात उन्हें  स्वीकार्य ही नहीं है। 

मेरे प्यारे नेताओं। मुझे यह स्वीकार्य नहीं है । एक महिला को पीटने और परेशान करने के लिए देश की पुलिस और सरकार को शर्म आनी चाहिए। 

इसे ध्यान में रखें: एक देश जो महिलाओं और गरीबों लोगों का सम्मान नहीं करता है, वह कभी प्रगति नहीं कर सकता। कभी नहीं।

प्यारे नेतागण, अगर तीन से पांच दिनों के भीतर यह बातचीत के द्वारा नहीं रुकता है, तो एक पुरानी कहावत याद कर लीजिएगा: “विनाश काले विपरीत बुद्धि”। (जब किसी का विनाश निकट होता है, तो उसकी बुद्धि उसके सर्वोत्तम हितों के विरुद्ध काम करती है)।

यदि आप ईमानदार नेता हैं और आपने कुछ भी गलत नहीं किया है, तो आपको कभी भी शांतिपूर्ण विरोध से डरना नहीं चाहिए और हमेशा चर्चा और वार्तालाप के लिए उपलब्ध रहना चाहिए। 

अपने ही लोगों को गले लगाने के लिए हाथ उठाएं, उन्हें परेशान करने के लिए नहीं।

जागो!! मेरे प्यारे नेताओं, जागो!

मैं सोनी पांडे, आम जनता के साथ भी, और उनके बाद भी।


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